Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 13, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 13, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 13 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
तत्प्राणपवनश्चित्तान्मुक्त इन्द्वंशुवत्फलम् ।
अवश्यायतया भूत्वा वीर्यं तेनान्तरास्थितः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
चन्द्रमा की किरणों के सम्बन्ध से, ऐसा जो कहा है, उसे स्पष्ट करते हैं।
शुक्र का प्राणवायु चेतनशक्ति से संमुच्छित होकर नीहाररूप से चन्द्रमा की किरणों के साथ सम्पर्क
होने से चन्द्रकिरण के तुल्य होकर धान द्वारा उसका फल चावल आदि होकर पुरुष में प्रविष्ट हो वीर्य
बनकर स्त्री के गर्भ में स्थित हुआ