Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 14, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
निर्विकल्पसमाधिस्थं विरतं द्वन्द्ववृत्तितः ।
हसन्तमखिलां लोकगतिं शीतलया धिया ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
वह निर्विकल्प समाधि में स्थित था, अतएव शीत-उष्ण आदि द्वन्द्व की वृत्तियों से शून्य
था । मानों वह अपनी शान्त बुद्धि द्वारा सम्पूर्ण लोकव्यवहार का उपहास कर रहा था