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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, Verse 28

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 14, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

मिथःकृतसमाचाराः शिलायां समुपाविशन् । मेरुपृष्ठे जगत्पूज्या ब्रह्मविष्णुहरा इव ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

तत्कालोचित परस्पर अभिनन्दन आदि व्यवहार कर लेने पर वे लोग शिला पर सुमेरु पीठ पर जगत्पूज्य ब्रह्मा-विष्णु-महेश्वर के तुल्य बैठे