Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, Verse 44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 14, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
उत्तिष्ठ तात गच्छामः पश्यामो मन्दरस्थिताम् ।
तां तनुं तावदाशुष्कां शुष्कां वनलतामिव ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे
पिताजी, उठिये चलें, सूखी हुई वनलता की नाई सूखे हुए मन्दराचल पर स्थित उस शरीर को देखें