Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 15, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 15, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
पश्यामि संशुष्कतया शवोदरदरी मम ।
प्रकाशार्कांशुजालेन विवेकेनेव शोभते ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
मेरे शव की उदररूपी गुहा सूख जाने के कारण
भीतर प्रविष्ट हुई प्रकाशमान सूर्य की किरणों के समूह से ऐसे शोभित हो रही है मानों विवेक से शोभित
हो रही हैं, ऐसा मैं देख रहा हू