Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 15, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 15, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
पश्य विश्रान्तसंदेहं विगताशेषकौतुकम् ।
निरस्तकलनाजालं सुखं शेते कथं वने ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
यह शरीर,
जिसके सम्पूर्ण सन्देह नष्ट हो गए हैं और सब कौतुक जिससे चले गए हैं, कल्पनाओं का जिसने निरास
कर दिया है, वन में कैसे सुख से सो रहा है, इसे आप देखिए