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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 15, Verse 35

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 15, verse 35 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 35

संस्कृत श्लोक

ज्ञस्याज्ञस्य च देहस्य यावद्देहमयं क्रमः । लोकवद्व्यवहारोऽयं सक्त्यासक्त्याथवा सदा ॥ ३५ ॥

हिन्दी अर्थ

चाहे ज्ञानी की देह हो चाहे अज्ञानी की देह हो, जब तक जीवन रहेगा सदा यह नियम चलेगा ही, इसमें रत्तीभर भी उलट-फेर नहीं हो सकता है। हाँ, इतना अन्तर अवश्य है कि ज्ञानी का यह दैहिक लोकव्यवहार अनासक्ति से होता है और अज्ञानी का आसक्ति से होता है