Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 15, Verse 4

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 15, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

उवाचेदं च हे तात तन्वी तनुरियं हि सा । या त्वया सुखसंभोगैः पुरा समभिलालिता ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

शुक्र ने यह कहा : हे तात, वही यह कृश शरीर है, जिसका आपने सुखदायक भोगों से पहले लालन-पालन किया था