Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 16, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 16, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
जीवन्मुक्तपदं प्राप्तस्तन्वा प्राक्तनरूपया ।
महासुरेन्द्रगुरुतां कुर्वंस्तिष्ठ महामते ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महामते, पूर्वकल्प में उपार्जित कर्मो
से प्राप्त शरीर द्वारा जीवन्मुक्तिरूप पद पाकर बड़े-बड़े दैत्यराजो का आचार्यत्व करते हुए आप स्थित
होये