Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 16, Verses 8–9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 16, verses 8–9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 8 ,9
संस्कृत श्लोक
गते तस्मिन्भगवति कृतान्ते भवितव्यताम् ।
विचार्य भार्गवोऽभेद्यां नियतेर्नियतां गतिम् ॥ ८ ॥
कालकारणसंशुष्कां भाविपुष्पशुभोदयाम् ।
विवेश तां तनुं बालां सुलतामिव माधवः ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
उस भगवान कृतान्त के चले जाने पर भृगुपुत्र शुक्राचार्य ने अवश्यभाविनी कर्मगति तथा
अनिवार्य ईश्वर की इच्छा की गति का विचार कर हेमन्त ओर शिशिर काल के कारण सूखी हुई भावी
पुष्प-फल के उदयवाली लता में वसन्तऋतु के तुल्य बहुत काल बीत जाने के कारण सूखी हुई भावी
अभ्युदय से युक्त उस देह में प्रवेश किया