Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 18, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
यथोदेति रसो भौमश्चित्तथोदेत्यसंभ्रमम् ।
चिद्रसोल्लासवृक्षाणां कचतामात्मनात्मनि ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
अपने में अपने-आप स्फुरित हो रहे दृश्यरूप सैकड़ों शाखाओं से युक्त
चिद्रसउल्लास वृक्षों का यहाँ पर अन्त नहीं जाना जाता, क्योकि “नानाखण्डसहस्त्रौघे: इससे ब्रह्माण्डों
की अनन्तता दर्शाई गई है