Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, Verse 46
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 18, verse 46 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
शुद्धा च सा सर्वगता तेन तन्मेलनं मिथः ।
सर्वेषां पद्मजादीनां स्वसत्ताभ्रमरूपकः ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
मिलन भी स्वकीय परकीय स्वप्नो के दैवात् कहीं संवाद के तुल्य अपने-अपने अन्तःकरण का
कल्पनामात्र ही है, इस आशय से कहते है।
ब्रह्मा आदि सब का स्वसत्ता से कल्पितभ्रम का प्रतिरूप यह जगद्रूप बड़ा भारी स्वप्न अन्दर उदित
हुआ है