Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, Verse 48
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 18, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
तेनोपलम्भः कुड्यादावसौ दृढतरः स्थितः ।
यद्यत्र चिद्भावयति तत्तत्राशु भवत्यलम् ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
चिति जहाँ पर जिसकी भावना करती
हैं, वहाँ पर वह शीघ्र ही उत्पन्न होता है । उसने स्वप्न में भी जिसको देखा, वह स्वप्न के समय में सत्य
ही है, इसीलिए उसमें चित् सत्ता के संबन्ध का अनुभव होता है ।