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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, Verse 59

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 18, verse 59 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 59

संस्कृत श्लोक

स्वयमन्तः प्रपश्यन्ति ये जगज्जीवविभ्रमम् । तैस्तैः कैश्चित्ततं दृश्यमसत्स्वप्नवदाश्रितम् ॥ ५९ ॥

हिन्दी अर्थ

जो अपने अन्दर दृश्य को देखनेवाले हैं, उनका द्वैतमिथ्यात्वज्ञान विशेष है, ऐसा कहते हैं। जो जगद्रूपी जीवभ्रम को स्वयं अपने अन्दर देखते हैं, उन थोड़े-से महापुरुषों ने चारों ओर व्याप्त दृश्य को स्वप्न के समान असत्‌ जान लिया है