Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 19, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 19, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
स्वप्नोऽपि स्वप्नसमये स्थैर्याज्जाग्रत्त्वमृच्छति ।
अस्थैर्याज्जाग्रदेवास्ते स्वप्नस्तादृशबोधतः ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
स्वप्न भी स्वप्न के समय में स्थिर होने के कारण जाग्रतभाव को प्राप्त होता है और जाग्रत के
मनोरथ भी जाग्रत के समय में अस्थिर होने से स्वप्न ही हैं, क्योंकि वैसा बोध होता है