Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 19, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 19, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
यत्तु यावत्स्थिरं बुद्धं तत्तावज्जाग्रदुच्यते ।
क्षणभङ्गात्तु तत्स्वप्नो यथा भवति तच्छ्रुणु ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
जब तक जो वस्तु स्थिर समझी जाय तब तक वह जाग्रत कही जाती है। क्षणमात्र में उसका भंग
होने पर वह जिस प्रकार स्वप्न हो जाता है, उसे सुनिये