Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 19, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 19, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
सुषुप्ते सौम्यतां यातैः प्राणैः संचाल्यते यदा ।
स जीवधातुः सा संवित्ततश्चित्ततयोदिता ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रस्तुत सुषुप्ति का ही अनुवाद करके उससे पहले पूर्वोक्त स्वप्नावस्था का विस्तार करने के लिए
चित्त की उत्पत्ति कहते है ।
सौम्यता को प्राप्त हुए प्राणों से युक्त वह जीव चेतन जब भोग करानेवाले अदृष्ट के परिपाक से
विषमता को प्राप्त किये गये प्राणों द्वारा ही संचालित होता है, तब वह जीव चेतन तत्-तत् भोगों के
अनुकूल पूर्वजन्म के संस्कारों के उद्बुद्ध होने के कारण चित्तरूप से उदित होता है