Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 19, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 19, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
भुवि जाता परिम्लाना बाला यत्प्रथमं पुरः ।
संवित्प्राप्नोति तद्रूपा भवत्यन्या न काचन ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
इसी तरह यह अव्युत्पन्न, मूढ संवित् जैसी व्युत्पत्ति से युक्त की जाती है, वैसी ही हो जाती है,
इसलिये इसे वास्तविक ब्रह्मरूप से ही व्युत्पनन करना चाहिए, मिथ्या जीवआदि भाव से नहीं, इस
आशय से उपसंहार करते हैं।
यह बाल संवित् संसार के व्यसन तथा संताप से जब तक मलिन न हुई हो, उसके पहले ही
सर्वप्रथम जिस भाव को प्राप्त होती है तद्रूप हो जाती है, कोई अन्य वस्तु नहीं होती