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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 2, Verse 20

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 2, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 2 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

नोद्यन्ति नच नश्यन्ति नायान्ति नच यान्ति च । महाशिलासु लेखानां सन्निवेशा इवाचलाः ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

स्फटिक शिला के भीतर नेत्र-दोष से दिखाई दे रही रेखाओं के तुल्य पदार्थ भेद नहीं है, ऐसा कहते हैं । जैसे महाशिलाओं के अन्दर रेखाओं के अमिट स्वरूप दिखाई देते हैं वैसे ही ये सृष्टियाँ दिखाई देती हैं । न तो ये उत्पन्न होती हैं और न नष्ट होती हैं, न आती हैं और न जाती हैं