Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 20, Verse 1
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 20, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 20 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
एतत्ते कथितं सर्वं मनोरूपनिरूपणम् ।
मया राघव नान्येन केनचिन्नाम हेतुना ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
पू्ववर्णित जाग्रदादिस्वरूप कथन का प्राकृत में सम्बन्ध दिखलाते है ।
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे वत्स श्रीरामचन्द्रजी, मैंने आपसे यह जाग्रदादि स्वरूप का वर्णन मन के
यथार्थ ज्ञान के लिए किया है, इसका और कोई दूसरा प्रयोजन नहीं है
सर्ग सन्दर्भ
उन्नीसर्वौँ सर्ग समाप्त बीसवाँ सर्ग संसार सत्य आत्मा का अवलम्बन न करनेवाली चित्त की भ्रान्ति है, सत्य आत्मा का अवलम्बन करने पर तो चित्त और संसार आत्मा ही है, यह वर्णन ।