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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 38

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 21, verse 38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 38

संस्कृत श्लोक

दृष्ट्वा दृश्यैकतानत्वं विद्धि त्वं मोहनं मनः । प्रमार्जयेव तन्मिथ्या महामलिनकर्दमम् ॥ ३८ ॥

हिन्दी अर्थ

मन को एक मात्र दृश्य में तत्पर देखकर आप दृश्य को मोह में डालनेवाला जानिये, उस अत्यन्त मलिन कर्दमरूप असत्यदृश्य का परिमार्जन कीजिये