Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 21, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
अनयोपहतो लोकः कल्याणं नाधिगच्छति ।
भास्वरं तापनालोकं पटलान्धेक्षणो यथा ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे पटल नामक रोग से अन्ध बना हुआ पुरुष सूर्य के दैदीप्य आलोक को नहीं
देखता, वैसे ही इस अविद्या से उपहत लोग अपना कल्याण नहीं जानते