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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 44

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 21, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 44

संस्कृत श्लोक

न सत्ता यस्य नासत्ता न सुखं नापि दुःखिता । केवलं केवलीभावो यस्यान्तरुपलभ्यते ॥ ४४ ॥

हिन्दी अर्थ

सत्यदृष्टि के प्राप्त होने पर असत्य जगत के क्षीण होने पर निर्मलस्वरूप निर्विकल्प चिद्रूप परमार्थ सत्य वह आत्मा प्राप्त होता है ॥४ ३॥ जिसकी न व्यक्तता है, न अव्यक्तता है, न सुख है और न दुःखिता है, अपने हृदय में जिसका केवल अद्वैतभाव अपने अनुभव से ही प्राप्त होता हे