Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 52
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 21, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 52
संस्कृत श्लोक
बालानां मध्यमे काले छाया वैतालिकी यथा ।
कल्पनावशतो जन्तोर्भावाभावशुभाशुभाः ॥ ५२ ॥
हिन्दी अर्थ
जीव की कल्पना के कारण धन-वैभव और दारिद्यरूप शुभ और अशुभ भाव एक क्षण
में तिरोभाव को प्राप्त हो जाते हैं और फिर क्षण भर में आविर्भूत हो जाते हैं