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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 62

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 21, verse 62 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 62

संस्कृत श्लोक

तदवस्त्विति निर्णीय मा तेनागच्छ रञ्जनम् । तदेव सत्यमिति वाप्यभिन्नं परमात्मनः ॥ ६२ ॥

हिन्दी अर्थ

अथवा उसका चिदात्मा के साथ एकता के अनुसन्धान द्वारा प्रविलापन करना चाहिये, ऐसा कहते हैं । हे राघवजी, वह सत्य ब्रह्म ही है अथवा परमात्मा से अभिन्न ही है, ऐसा अपने हृदय में निश्चय कर आप जन्म-विनाशरहित आत्मा की अपने से भावना कीजिये