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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 21, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

सहजो नीलिमा व्योम्नि शोभते प्रावृषः क्षये । प्रावृषि त्वतनूदग्रपयोदपटलोत्थितः ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

इस समय यह आपका प्रश्न वर्षा ऋतु में आकाश की स्वाभाविक नीलिमा के वर्णन के तुल्य है, ऐसा कहते हैं। वर्षा ऋतु के बीत जाने पर आकाश की स्वाभाविक नीलिमा सुशोभित होती है; किन्तु वर्षा ऋतु में तो उस पर बड़े बड़े विशालकाय बादलों की घटा छाई रहती है