Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 22, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
प्रज्ञा हृदयहारिण्यो भुवनाह्लादनक्षमाः ।
सत्त्वलब्धाः प्रवर्धन्ते सकलेन्दोरिवांशवः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
सम्पूर्ण लोकों को आनन्दित करने में
समर्थ, सत्त्वगुण की वृद्धि से प्राप्त हुई मनोहर प्रज्ञाएँ पूर्णचन्द्रमा की किरणों की भाँति बढ़ती हैं