Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 22, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
विचारणा परिज्ञातस्वभावस्योदितात्मनः ।
अनुकम्प्या भवन्तीह ब्रह्मविष्ण्विन्द्रशंकराः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके महाप्रभाव का वर्णन करते है।
जिसने विचार से स्वरूप का ज्ञान प्राप्त कर लिया है, जिसे आत्मा का प्रकाश हो गया है, ऐसे
महापुरुष के इस संसार में ब्रह्मा, विष्णु, इन्द्र, शंकर भी अनुकम्पनीय (करुणा के पात्र) है, क्योकि
उनमें भी अवतार धारण आदि अधिकार के क्लेश देखे जाते हैं