Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 22, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

विवेक उदिते शीते मिथ्या भ्रममरूदिता । क्षीयते वासना साग्रे मृगतृष्णा मराविव ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

भ्रमरूपी मरुस्थल मेँ उत्पन्न हुई मिथ्या संसारवासना शीतल विवेक का उदय होने पर चन्द्रमा के सहित प्रदोषकाल के आने पर मरुस्थलमें उत्पन्न हुई मृगतृष्णा की भाँति नष्ट हो जाती है