Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 22, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 22, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 22 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
अप्रतर्क्यमनाभासं सन्मात्रमिदमित्यलम् ।
हेयोपादेयकलना यस्य क्षीणा स वै पुमान् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
यह जगत पूर्णरूप से तर्कं से अगम्य, वृत्तिके परिणाम से रहित यानी निर्विशेष सन्मात्र ही है,
यह जानकर जिस पुरुष की हेय ओर उपादेयभावना नष्ट हो गई है वही पुरुष हे