Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
हृदयापणनिर्णीतयथाप्राप्तार्थभूषिता ।
अनारतनवद्वारप्रवहत्प्राणनागरा ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
हृदय में स्थित विचाररूपी जौहरियों द्वारा
परीक्षा करके खरीदे गये ओर चक्षु आदि द्वारा प्राप्त जो शब्द आदि अर्थ हँ, वासनारूपी उन विक्रेय
वस्तुओं से यह भूषित हे । इसमें प्राणरूपी नागरिक नौ दरवाजों से निरन्तर संचार कर रहे है