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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 21

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

शब्दरूपरसस्पर्शगन्धबन्धुश्रियो यतः । अनयैव हि लभ्यन्ते तेनेयं ज्ञस्य लाभदा ॥ २१ ॥

हिन्दी अर्थ

शब्द, रूप, रस, स्पर्श, गन्ध आदि विषय, बन्धु-बान्धव और मोक्ष इसी शरीररूपी महानगरी से प्राप्त होते हैं, इसलिए यह ज्ञानी को लाभ देने वाली कही गई हे