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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 28

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

सकलाक्षजनादृश्यसुखप्रेक्षापराङ्मुखः । ध्याननाम्नि सुखं नित्यं तिष्ठत्यन्तःपुरान्तरे ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

इन्द्रियरूपी सब लोगों से आपाततः देखे जानेवाले विषयों में सुख की दृष्टि से विमुख हुआ वह ध्यान नामक अन्तःपुर के भीतर नित्य सुखपूर्वक बैठा रहता हे