Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 54
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 54 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 54
संस्कृत श्लोक
अनार्तेन हि सन्मानो बहुमानो न बुध्यते ।
पूर्णानां सरितां प्रावृट्पूरः स्वल्पो न राजते ॥ ५४ ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त भाव को ही पुनः विशद करते है ।
जैसे भरी हुई नदियों का वर्षाकाल का थोडा सा प्रवाह सुशोभित नहीं होता, वैसे ही जब तक पुरुष
पीडित न हो तब तक उसको सम्मान या बहुमान प्रतीत नहीं होता