Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 60
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 23, verse 60 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
एतावति धरणितले सुभगास्ते साधुचेतनाः पुरुषाः ।
पुरुषकलासु च गण्या न जिता ये चेतसा स्वेन ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
जिसने मन पर विजय प्राप्त की है, उसकी प्रशंसा ओर वन्दना द्वारा इन्द्रिय निग्रह के फलरूपः
मनोविजय की प्रशंसा करते हैं।
इतने बड़े भूमण्डल पर वे ही साधु चित्तवाले पुरुष धन्य हैं, वे ही पुरुषों के बन्ध-मोक्ष कौशलों में
गणनीय हैं, जिन पर उनके चित्त ने विजय नहीं पाई