Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 24, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 24, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
इन्द्रियारीनलं जित्वा तीर्णो भव भवार्णवात् ।
असत्येव शरीरेऽस्मिन्सुखदुःखेष्वसत्सु च ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोई कहे कि उत्पत्ति प्रकरण में तो इन्द्रियो की असत्यता बतलाई है। तो क्यो यहाँ उसकी
जय के उपाय का उपदेश करते हैं, उस पर श्रीवसिष्ठजी कहते है;
हे श्रीरामचन्द्रजी, असत्य इस शरीर में तथा असत्य सुख-दुःखों मेँ आपको दाम-व्याल-कट
न्याय की प्राप्ति न हो