Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, Verses 37–38
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 27, verses 37–38 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
दामव्यालकटास्त्वेते युद्धाभ्यासवशेन च ।
अहंकारमयीं मत्तास्ते ग्रहीष्यन्ति वासनाम् ॥ ३७ ॥
यदा तेऽत्यज्ञपुरुषाः शम्बरेण विनिर्मिताः ।
वासनामाश्रयिष्यन्ति तदा यास्यन्ति जेयताम् ॥ ३८ ॥
हिन्दी अर्थ
वासना का ग्रहण करेगे