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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 27, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

अलब्धेष्वमरौघेषु दामव्यालकटास्तदा । जग्मुः पातालकोशस्थं प्रभुं प्रमुदिताशयाः ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

देवताओं के न मिलने पर उस समय प्रसन्न हृदय हुए दाम, व्याल और कट पाताल के मध्य में स्थित अपने प्रभु शम्बरासुर के पास गये