Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 28, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
शैलास्त्रशस्त्रगरुडाचलचालितोच्चनागं महासुरगणाङ्गणमन्तरिक्षम् ।
आसीत्क्षणं जलधिभिः क्षणमग्निपूरैः पूर्णं क्षणं दिनकरैः क्षणमन्धकारैः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
सुर ओर असुरो का युद्ध भूमिरूप आकाश शूलरूपी अस्त्रो, शस्त्रों, मायारचित
गरुडो से ओर उखाडकर फेंकी गयी चट्टानों से पूर्ववर्णित दृष्टि विषवाले नागों से रहित होकर क्षणभर
में समुद्रो से भर जाता था, क्षणभर में अग्नि की ज्वालाओं से पूर्ण हो जाता था, क्षणभर में सूर्यो से
पट जाता था ओर क्षण भर में अन्धकार पटलों से व्याप्त हो जाता था