Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 28, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
सुरासुराद्रीन्द्रशरीरमुक्तै रक्तप्रवाहैरभितो भ्रमद्भिः ।
बभार पूर्णं परितोऽम्बरोऽद्रेः संध्याकरौघक्षतमङ्ग गङ्गाम् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, मेरु पर्वत चारों ओर आकाश सुर ओर असुररूपी उत्तम पर्वतो के शरीरो से
निकले हुए, चारों ओर घूम रहे, रक्तप्रवाहों से पूर्ण सन्ध्यारूपी नायिका के नखक्षतों को धारण
करता था अथवा पूर्वोक्त रक्तप्रवाहों से पूर्ण गंगा को धारण करता था