Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 28, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
मध्यप्रवाहवहदुल्मुकशूलशैलप्रासासिकुन्तशरतोमरमुद्गरौघा
गङ्गोपमाम्बुवलितामरमन्दिरेण सर्वासु दिक्ष्वशनिवर्षनिकर्षणेन ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
पूर्वोक्त नदी का ही फिर वर्णन करते हैं।
जिसके मध्यप्रवाह मेँ उल्मुक (अधजली लकड़ियाँ), त्रिशूल, पर्वत, भाले, तलवार, बर्छियाँ, बाण,
तीर ओर मुद्गरो की राशियाँ बह रही थी, ऐसी वह नदी जिसने जल की नाई देव मन्दिरों को नष्ट कर
दिया था, ऐसे वज्र आदि आयुधो की वृष्टि से हुए तटभंग से गंगा के सदृश थी यानी मेरु आदि पर्वतो पर
बहने वाली गंगा के तुल्य थी