Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 31, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
सन्त एव स्थिताः सन्तो ब्रह्मन्वयमिमे किल ।
दामादयस्त्वसन्तोऽपि वक्षि सन्तः स्थिता इति ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : ब्रह्मन्, ये हम लोग सत् होकर ही स्थित है।
असत् भी दाम आदि सत् है, ऐसा आप कहते हैं। भाव यह है कि हमलोगों की सत्ता प्रत्यक्ष आदि प्रमाण
से सिद्ध है। माया मात्र होने से दाम आदि की असत्ता स्वयं आपने ही कही है, फिर पूर्वापर विरुद्ध उनकी
सत्ता आप कैसे कहते हैं, कृपया बतलाइये, आपका क्या अभिप्राय है ?