Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 31, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
निश्चयोऽन्तःप्ररूढो यः संपन्नोऽभ्यसनं विना ।
नाशमायाति लोकेऽस्मिन्न कदाचन कस्यचित् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
इसी प्रकार पूर्वोत्पन्न कुसंस्कारों का नाश शात्त्रार्थ तत्व के अभ्यास के बिना उदित नहीं होता,
ऐसा कहते हैं।
हृदय में आरूढ़ हुआ जो निश्चय प्राप्त हो गया, इस लोक में कभी किसी का भी वह निश्चय
शास्त्राभ्यास के बिना नष्ट नहीं होता