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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 31, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

अक्षीबक्षीवयोरैक्यं क्व किलेहाज्ञतज्ज्ञयोः । अन्धप्रकाशयोर्बोधे स्याच्छायातपयोरिव ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि अज्ञो को उपदेश न दे और अज्ञोके साथ अज्ञचेष्टा से ही ज्ञानी भी व्यवहार करे, तो वह भी अज्ञ ही हो जायेगा, ऐसी अवस्था मे अज्ञ ओर ज्ञानी की एकता हो जायेगी, ऐसी आशंका पर कहते है। जैसे मदिरा के नशे में मत्त और नशे से रहित पुरुषों की, अन्धकार और प्रकाश की एवं छाया ओर प्रकाश की एकता नहीं हो सकती वैसे ही बोध विषय में अज्ञ और ज्ञानी की भी एकता यहाँ नहीं हो सकती