Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 31, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
अस्मदादिस्वरूपेण संविद्यत्रोदिता स्वयम् ।
तथासौ तत्र संपन्ना तथाकारानुभूतितः ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
जहाँ पर हम लोगों के स्वरूप से संवित् स्वयं उदित हुई, वहाँ पर वह वैसे आकार
के अनुभव से वैसी ही बन गई