Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 32, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
भविष्यति गृहे तस्य क्रीडनः क्रकरः खगः ।
कटो मायासुरो नाम कृतराजतपञ्जरः ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
मायामय असुर कट उस मन्त्री के घर में उसका क्रीडा साधन एक मैनारूप होगा,
चाँदी के पिंजडे मे उसका निवास होगा