Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 32, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
प्रद्युम्नशिखरप्रान्तवास्तव्यः कलविङ्ककः ।
तत्रत्यैश्च कथां श्रुत्वा परं निर्वाणमेष्यति ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रद्युम्न नामक शिखर के एक प्रदेश में रहनेवाला गौरिया वहाँ
पर रहनेवाले लोगों के मुँह से उक्त कथा को सुनकर परम निर्वाण को प्राप्त होगा