Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 32, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
प्रद्युम्नश्रृङ्गाच्चटको मशको राजमन्दिरात् ।
विहारात्क्रकरश्चेति मोक्षमेष्यन्ति राघव ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार हे
श्रीरामचन्द्रजी, प्रद्युम्न शिखर से गौरिया, राजमहल से मच्छर ओर रत्नावली विहारनामक क्रीडागृह
से मैना ये तीनों मुक्त हो जायेंगे