Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, Verses 5–6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 32, verses 5–6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
स्थिति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 5,6
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
काश्मीरेषु महापद्मसरसीतीरपल्वले ।
भूयोभूयोऽनुभूयैव मत्स्ययोनिपरम्पराम् ॥ ५ ॥
आलोलिताशया लोलाः कालेन लयमागताः ।
तत्रैव पद्मसरसि ते भविष्यन्ति सारसाः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, काश्मीर देश में
बड़ेभारी कमलों के तालाब के तीर की तलैया में बार-बार मछली की योनियों का भोग करके ग्रीष्म ऋतु
में भैंस, सूअर आदि से जिनकी तलैया रौंदी गई थी, अतएव चंचल तथा समय पाकर काल के शिकार
हुए वे उसी कमल के तालाब में सारस होंगे