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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 32, Verse 57

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के स्थिति प्रकरण, सर्ग 32, verse 57 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

स्थिति प्रकरण · सर्ग 32 · श्लोक 57

संस्कृत श्लोक

सुप्तं मास्थीयतां वृद्धकच्छपेनेव पल्वले । उत्थानमङ्गीक्रियतां जरामरणशान्तये ॥ ५७ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे बूढ़ा कछुआ तालाब में सोया रहता हे, वैसे सोये रहना ठीक नहीं है । जरा, मरण आदि दुःखों की निवृत्ति के लिए उद्योग करना चाहिये